Considerations To Know About Shiv Chalisa
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त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु अब संकट भारी ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।
शंकर हो संकट के नाशन । मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी । more info पाठ करे सो पावन हारी ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
बुरी आत्माओं से मुक्ति के लिए, शनि के प्रकोप से बचने हेतु हनुमान चालीसा का पाठ करें
अर्थ- हे स्वामी, इस विनाशकारी स्थिति से मुझे उभार लो यही उचित अवसर। अर्थात जब मैं इस समय आपकी शरण में हूं, मुझे अपनी भक्ति में लीन कर मुझे मोहमाया से मुक्ति दिलाओ, सांसारिक कष्टों से उभारों। अपने त्रिशुल से इन तमाम दुष्टों का नाश कर दो। हे भोलेनाथ, आकर मुझे इन कष्टों से मुक्ति दिलाओ।
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे । शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥